Noida में विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर करीब ₹70 लाख से अधिक की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर सोशल मीडिया के जरिए बेरोजगार युवाओं को झांसा देकर मोटी रकम ऐंठने का आरोप है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नकली दस्तावेज, पासपोर्ट, मोबाइल फोन और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है।
कैसे हुआ खुलासा?
मामले का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित युवक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उससे विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये लिए गए, लेकिन न तो वीजा मिला और न ही नौकरी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपियों को ट्रैक कर गिरफ्तार कर लिया।
आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
- Niyaz Ahmad उर्फ अरमान (43 वर्ष) – दिल्ली के बटला हाउस का निवासी
- Raju Shah (33 वर्ष) – मूल रूप से बिहार के सिवान के रहने वाले, वर्तमान में गुरुग्राम के मानेसर में रह रहे थे
दोनों आरोपियों को नोएडा के सेक्टर-94 क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार ये लोग एक फर्जी प्लेसमेंट एजेंसी के नाम पर ठगी कर रहे थे।
ठगी का तरीका: सोशल मीडिया बना हथियार
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने फेसबुक, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विदेश में नौकरी के आकर्षक विज्ञापन पोस्ट किए। इनमें यूके, अमेरिका, कनाडा और खाड़ी देशों में उच्च वेतन वाली नौकरियों का लालच दिया जाता था।
ठगी की पूरी प्रक्रिया
सोशल मीडिया पर विज्ञापन पोस्ट करना
इच्छुक उम्मीदवारों से व्हाट्सएप कॉल या चैट के माध्यम से संपर्क
फर्जी ऑफर लेटर और वीजा दस्तावेज भेजना
प्रोसेसिंग फीस, वीजा चार्ज, मेडिकल और टिकट के नाम पर पैसे लेना
पैसा मिलने के बाद संपर्क तोड़ देना
पुलिस का दावा है कि इस तरीके से आरोपियों ने लगभग 100 से अधिक युवाओं से ₹70 लाख से ज्यादा की रकम वसूली।
बरामद सामग्री
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से निम्नलिखित सामान बरामद किया:
- 9 भारतीय पासपोर्ट
- 4 मोबाइल फोन
- 1 लैपटॉप
- नकली वीजा और ऑफर लेटर
- फर्जी एयरलाइन टिकट की कॉपियां
- प्रचार सामग्री
- ₹73,500 नकद
बरामद दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि आरोपियों ने पेशेवर तरीके से ठगी की योजना बनाई थी।
पीड़ितों की कहानी
एक पीड़ित युवक ने बताया कि उससे करीब ₹1.5 लाख रुपये लिए गए थे। उसे भरोसा दिलाया गया कि तीन महीने के अंदर उसे यूके भेज दिया जाएगा। जब उसने बार-बार वीजा और टिकट की जानकारी मांगी, तो उसे टालमटोल जवाब दिए गए। आखिरकार जब संपर्क बंद हो गया, तो उसे धोखाधड़ी का एहसास हुआ।
कई अन्य पीड़ितों ने भी इसी तरह की शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस का मानना है कि पीड़ितों की संख्या और बढ़ सकती है।
पुलिस की कार्रवाई और धाराएं
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें शामिल हैं:
- धोखाधड़ी (Cheating)
- जालसाजी (Forgery)
- आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy)
- विश्वासघात (Breach of Trust)
पुलिस अब बैंक खातों की जांच कर रही है, ताकि ठगी की पूरी रकम और अन्य संभावित सहयोगियों का पता लगाया जा सके।
क्यों फंसते हैं लोग?
विशेषज्ञों का कहना है कि बेरोजगारी और विदेश में बेहतर अवसर पाने की चाहत के कारण युवा ऐसे झांसे में जल्दी आ जाते हैं। सोशल मीडिया पर दिखने वाले आकर्षक विज्ञापन और नकली दस्तावेज देखकर लोग भरोसा कर लेते हैं।
सावधान रहने की जरूरत
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि:
- किसी भी विदेश नौकरी के ऑफर की आधिकारिक वेबसाइट पर पुष्टि करें
- किसी भी एजेंसी को अग्रिम भुगतान करने से बचें
- सरकारी मान्यता प्राप्त एजेंसियों से ही संपर्क करें
- संदिग्ध ऑफर मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें
याद रखें — कोई भी असली कंपनी नौकरी देने के लिए पहले पैसे नहीं मांगती।
आपकी क्या राय है?
इस पूरे मामले को लेकर आप क्या सोचते हैं? क्या विदेश नौकरी के नाम पर हो रही ठगी रोकने के लिए सख्त कानून और निगरानी की जरूरत है? अपनी राय हमें कमेंट करके जरूर बताएं।
