हरियाणा के झज्जर जिले से एक सनसनीखेज अपहरण का मामला सामने आया था, जिसने पूरे इलाके में डर और चिंता का माहौल पैदा कर दिया था। एक 9 साल के मासूम बच्चे का अपहरण कर लिया गया था और उसके बदले परिवार से करोड़ों रुपये की फिरौती मांगी गई थी।
हालांकि राहत की बात यह रही कि हरियाणा पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बेहद तेज कार्रवाई करते हुए इस मामले को करीब 20 घंटे के भीतर सुलझा लिया और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपियों में से एक अंतरराष्ट्रीय पैरा जूडो खिलाड़ी भी निकला।
कैसे हुआ 9 साल के बच्चे का अपहरण
यह घटना 4 मार्च 2026 को हरियाणा के झज्जर जिले के बरानी गांव में हुई। अपहरण किए गए बच्चे का नाम हुनरजीत बताया जा रहा है। वह एक स्थानीय नर्सिंग कॉलेज के मालिक का बेटा है और पास के स्कूल में पढ़ता है।
बताया जा रहा है कि उस दिन बच्चा सामान्य तरीके से घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान पहले से घात लगाए बैठे आरोपियों ने उसे अपने जाल में फंसा लिया।
आरोपियों ने बच्चे को बहला-फुसलाकर पास की एक दुकान तक बुलाया। वहां पहले से तैयार खड़ी गाड़ी में बैठाकर उसे अगवा कर लिया गया। आसपास के लोगों को इस घटना की भनक तक नहीं लगी।
परिवार को आया फिरौती का फोन
बच्चे के गायब होने के कुछ समय बाद ही परिवार को एक फोन कॉल आया। फोन करने वाले ने बताया कि बच्चे का अपहरण कर लिया गया है और उसे सुरक्षित वापस पाने के लिए 5 करोड़ रुपये की फिरौती देनी होगी।
इतनी बड़ी रकम की मांग सुनकर परिवार घबरा गया। हालांकि उन्होंने तुरंत पुलिस को इसकी जानकारी दी और मामले की शिकायत दर्ज कराई।
परिवार की शिकायत मिलते ही पुलिस ने इसे बेहद गंभीर मामला मानते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी।
पुलिस और STF ने शुरू की ताबड़तोड़ कार्रवाई
जैसे ही अपहरण की सूचना मिली, हरियाणा पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की टीम सक्रिय हो गई। पुलिस ने बच्चे को जल्द से जल्द सुरक्षित खोजने के लिए कई कदम उठाए।
पुलिस ने जांच के दौरान:
- इलाके के CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली
- मोबाइल कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच की
- संदिग्ध लोगों से पूछताछ की
- तकनीकी सर्विलांस का इस्तेमाल किया
इन सभी तरीकों से पुलिस को धीरे-धीरे कुछ अहम सुराग मिलने लगे।
20 घंटे के भीतर केस सुलझा
पुलिस की तेज जांच और तकनीकी मदद के कारण यह मामला ज्यादा लंबा नहीं चला। करीब 20 घंटे के अंदर ही पुलिस ने अपहरणकर्ताओं का पता लगा लिया।
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई:
- मोनू – रोहतक जिले के कांसाला गांव का निवासी
- मनीष उर्फ सीन्टू – झज्जर जिले के बरानी गांव का निवासी
इन दोनों को हिरासत में लेकर पुलिस ने पूछताछ शुरू कर दी।
आरोपी निकला अंतरराष्ट्रीय पैरा जूडो खिलाड़ी
इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का पैरा जूडो खिलाड़ी है।
बताया जा रहा है कि उसने एशियन पैरा गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया था और राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत चुका है।
एक खिलाड़ी का इस तरह के अपराध में शामिल होना लोगों के लिए बेहद चौंकाने वाली बात थी।
परिवार की जानकारी का उठाया फायदा
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी मनीष पहले पीड़ित परिवार के यहां काम कर चुका था। वह परिवार की गौशाला में काम करता था, जिसकी वजह से उसे परिवार की दिनचर्या और बच्चे की गतिविधियों के बारे में पूरी जानकारी थी।
उसी जानकारी का फायदा उठाकर उसने अपने साथी के साथ मिलकर अपहरण की योजना बनाई।
बच्चे को कहां रखा गया
अपहरण के बाद आरोपियों ने बच्चे को कुछ समय तक अपने कब्जे में रखा। पुलिस की जांच और दबाव बढ़ने के बाद आरोपियों ने बच्चे को रोहतक बाईपास के पास छोड़ दिया।
बाद में पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया और उसे उसके परिवार के पास पहुंचा दिया।
बच्चे के सुरक्षित मिलने के बाद परिवार और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
पुलिस अभी भी कर रही है जांच
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस मामले में दो और लोगों की संलिप्तता की संभावना है। फिलहाल वे फरार बताए जा रहे हैं और उनकी तलाश जारी है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि:
- अपहरण की पूरी योजना कैसे बनाई गई
- फिरौती की रकम का क्या हुआ
- इस अपराध में और कौन-कौन शामिल था
पुलिस का कहना है कि जल्द ही बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
इलाके में फैला डर और हैरानी
इस घटना के बाद पूरे इलाके में डर और हैरानी का माहौल है। लोगों को विश्वास नहीं हो रहा कि एक मासूम बच्चे का अपहरण इस तरह से किया जा सकता है।
खासकर यह बात लोगों को ज्यादा चौंकाने वाली लगी कि इस अपराध में एक राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी भी शामिल निकला।
आपकी क्या राय है?
मासूम बच्चे के अपहरण की यह घटना कई सवाल खड़े करती है। क्या ऐसे मामलों को रोकने के लिए सुरक्षा और सख्त कानून की जरूरत है? इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट करके जरूर बताएं।
