तारीख: 13 मार्च 2026
राजस्थान में एक बड़ा आर्थिक घोटाला सामने आया है, जिसने हजारों लोगों की मेहनत की कमाई को खतरे में डाल दिया। निवेश पर मोटा मुनाफा देने का लालच देकर लोगों को एक कथित डिजिटल स्कीम में पैसा लगाने के लिए फंसाया गया और बाद में करोड़ों रुपये की ठगी का मामला सामने आया। पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ कि यह पूरा नेटवर्क एक पोंजी स्कीम के जरिए चलाया जा रहा था, जिसमें नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता था।
इस मामले में पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है और पूरे गिरोह के नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस स्कीम के जरिए करीब 19 करोड़ रुपये से अधिक की रकम लोगों से वसूली गई।
कैसे शुरू हुई ठगी की योजना
जांच के अनुसार आरोपियों ने एक कंपनी बनाकर लोगों के सामने एक नई डिजिटल निवेश योजना पेश की। इस योजना को आधुनिक और सुरक्षित निवेश का नाम देकर प्रचारित किया गया। लोगों को बताया गया कि यह एक नई तकनीक पर आधारित डिजिटल करेंसी है जिसमें निवेश करने पर उन्हें कम समय में कई गुना मुनाफा मिलेगा।
लोगों को इस स्कीम में शामिल करने के लिए सोशल मीडिया, वेबसाइट, सेमिनार और प्रचार कार्यक्रमों का इस्तेमाल किया गया। गांवों और छोटे शहरों में जाकर लोगों को समझाया गया कि यह भविष्य की सबसे बड़ी निवेश योजना है और इसमें पैसा लगाने से उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है।
शुरुआत में लोगों से छोटी रकम निवेश करने के लिए कहा गया ताकि उनका भरोसा जीता जा सके। धीरे-धीरे लोगों ने इस स्कीम में हजारों और लाखों रुपये तक निवेश करना शुरू कर दिया।
“HVT Coin” के नाम पर निवेश का लालच
जांच में सामने आया कि इस घोटाले में Harvest AI Technology Private Limited नाम की कंपनी का इस्तेमाल किया गया। इसी कंपनी के जरिए “HVT Coin” नाम की डिजिटल करेंसी लॉन्च की गई।
लोगों को बताया गया कि यह डिजिटल कॉइन भविष्य में बहुत महंगा हो जाएगा और जो लोग अभी इसमें निवेश करेंगे उन्हें कई गुना फायदा होगा। इसके अलावा निवेशकों को यह भी कहा गया कि अगर वे नए लोगों को इस स्कीम में जोड़ेंगे तो उन्हें अतिरिक्त बोनस और कमीशन मिलेगा।
यही तरीका पोंजी स्कीम का मुख्य हिस्सा होता है, जिसमें लोगों को नेटवर्क बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
हजारों लोग बने शिकार
पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस स्कीम में 82 हजार से ज्यादा लोगों को जोड़ा गया। कई लोगों ने अपनी जमा पूंजी और बचत का पैसा इस योजना में लगा दिया।
कुछ लोगों ने अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को भी इसमें निवेश करने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में कुछ निवेशकों को थोड़ा बहुत मुनाफा भी दिया गया ताकि बाकी लोगों का भरोसा बना रहे।
लेकिन जैसे-जैसे निवेश बढ़ता गया, आरोपियों ने बड़ी रकम अपने पास रखनी शुरू कर दी और धीरे-धीरे निवेशकों को भुगतान बंद कर दिया। इसके बाद लोगों को समझ में आया कि वे एक बड़े घोटाले का शिकार हो चुके हैं।
आरोपी की गिरफ्तारी
इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 34 वर्षीय सुरेश सैनी नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार वह इस पूरे नेटवर्क का सक्रिय सदस्य था और गांव-गांव जाकर लोगों को इस स्कीम में निवेश करने के लिए प्रेरित करता था।
जांच में सामने आया कि उसने अकेले ही दर्जनों लोगों से करोड़ों रुपये इकट्ठा किए थे। बताया जा रहा है कि उसने करीब 56 लोगों से लगभग 3.5 करोड़ रुपये जुटाए और कई निवेशक आईडी तैयार करवाईं।
इस काम के बदले उसे इनाम के तौर पर एक महंगी SUV गाड़ी (स्कॉर्पियो) दी गई थी, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया है।
गिरोह के अन्य सदस्य
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरे घोटाले के पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा था। इस नेटवर्क में कई लोग शामिल थे जो अलग-अलग क्षेत्रों में एजेंट के रूप में काम कर रहे थे।
मुख्य आरोपियों में कुछ नाम सामने आए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- बंशीलाल उर्फ प्रिंस सैनी
- ममता भाटी
- दिनेश बागड़ी
इनमें से कुछ लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस की जांच और कार्रवाई
राजस्थान पुलिस और SOG की टीम इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। जांच के दौरान कई बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जांच की जा रही है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि:
- कुल कितने लोगों से पैसा लिया गया
- ठगी की कुल रकम कितनी है
- पैसा किन-किन खातों में ट्रांसफर किया गया
- इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं
पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
पोंजी स्कीम कैसे करती है काम
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार पोंजी स्कीम एक ऐसी धोखाधड़ी होती है जिसमें निवेशकों को ज्यादा मुनाफे का लालच दिया जाता है। शुरुआत में कुछ लोगों को पैसा देकर भरोसा बनाया जाता है और फिर नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता है।
जब स्कीम में नया पैसा आना बंद हो जाता है तो पूरा सिस्टम ढह जाता है और निवेशकों का पैसा डूब जाता है।
इसी वजह से ऐसे निवेश योजनाओं से सावधान रहने की सलाह दी जाती है।
आपकी क्या राय है?
इस पूरे मामले को लेकर आपकी क्या राय है? क्या जल्दी पैसा कमाने के लालच में लोग ऐसे निवेश घोटालों का शिकार बन रहे हैं? इस तरह की पोंजी स्कीम को रोकने के लिए सरकार और प्रशासन को क्या सख्त कदम उठाने चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं।
