भारतीय क्रिकेट जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज़ Rinku Singh के पिता Khanchand Singh का 27 फरवरी 2026 को निधन हो गया। वे लंबे समय से स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे और ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। परिवार के लिए यह क्षण बेहद भावुक और कठिन है, क्योंकि रिंकू सिंह के संघर्ष और सफलता की कहानी में उनके पिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।
लंबी बीमारी के बाद अंतिम सांस
खांचंद सिंह पिछले कई महीनों से गंभीर बीमारी से लड़ रहे थे। डॉक्टरों के अनुसार उन्हें स्टेज-4 लिवर कैंसर था, जो काफी उन्नत अवस्था में पहुंच चुका था। हाल के दिनों में उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ी और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।
रिंकू सिंह उस समय अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारतीय टीम का हिस्सा थे, लेकिन जैसे ही पिता की हालत नाजुक होने की खबर मिली, उन्होंने तुरंत टीम से ब्रेक लिया और घर लौट आए। परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, अंतिम समय में रिंकू अपने पिता के साथ मौजूद थे।
उनके निधन की खबर सामने आते ही क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई। कई पूर्व और वर्तमान खिलाड़ियों ने सोशल मीडिया पर संवेदना व्यक्त की और रिंकू के परिवार को इस कठिन समय में हिम्मत रखने का संदेश दिया।
परिवार के लिए सबसे बड़ा सहारा थे खांचंद सिंह
खांचंद सिंह साधारण पृष्ठभूमि से थे और उन्होंने अपने परिवार का पालन-पोषण बेहद सीमित संसाधनों में किया। वे एक गैस सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे और परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी।
लेकिन आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने बेटे के क्रिकेट सपने को कभी टूटने नहीं दिया। जब रिंकू को क्रिकेट किट की जरूरत होती थी या टूर्नामेंट के लिए बाहर जाना होता था, तो पिता हर संभव कोशिश करते थे कि पैसे की कमी आड़े न आए।
परिवार के लोगों का कहना है कि रिंकू की हर उपलब्धि पर उनके पिता की आंखों में गर्व और खुशी साफ झलकती थी।

रिंकू सिंह का बचपन और पिता का संघर्ष
रिंकू सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक साधारण परिवार में हुआ। बचपन से ही उन्हें क्रिकेट खेलने का शौक था, लेकिन हालात आसान नहीं थे। घर छोटा था, संसाधन सीमित थे, और परिवार की आय बहुत कम थी।
रिंकू अक्सर मोहल्ले की गलियों में टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलते थे। कई बार उन्हें अभ्यास के लिए सही बैट और जूते तक उपलब्ध नहीं होते थे। लेकिन उनके पिता खांचंद सिंह ने हमेशा उनका मनोबल बढ़ाया।
एक समय ऐसा भी आया जब परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि रिंकू को नौकरी करने की सलाह दी गई। उन्होंने एक सफाई कर्मचारी की नौकरी भी स्वीकार की थी, लेकिन क्रिकेट के प्रति जुनून उन्हें वापस मैदान पर ले आया।
खांचंद सिंह ने अपने बेटे को कभी हार मानने नहीं दी। वे सुबह-सुबह काम पर जाते और शाम को लौटकर रिंकू से अभ्यास के बारे में पूछते। उन्होंने कभी अपने बेटे पर आर्थिक दबाव का बोझ नहीं डाला।
जब रिंकू को आईपीएल में मौका मिला और बाद में टीम इंडिया में जगह मिली, तो यह उनके पिता के लिए सबसे गर्व का पल था। कई इंटरव्यू में रिंकू ने कहा है कि “अगर पापा का समर्थन न होता, तो मैं आज यहां नहीं होता।”
इसलिए उनके निधन का दुख सिर्फ एक पारिवारिक क्षति नहीं, बल्कि एक भावनात्मक स्तंभ के टूटने जैसा है।
क्रिकेट जगत की प्रतिक्रिया
रिंकू सिंह के पिता के निधन की खबर सामने आते ही कई क्रिकेटरों ने सोशल मीडिया पर संवेदना व्यक्त की। साथी खिलाड़ियों ने कहा कि वे इस कठिन समय में रिंकू के साथ खड़े हैं।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अधिकारियों ने भी शोक व्यक्त किया। कुछ खिलाड़ियों ने अपने संदेश में लिखा कि “एक पिता का आशीर्वाद ही बेटे को ऊंचाइयों तक पहुंचाता है।”
फैंस ने भी सोशल मीडिया पर #StayStrongRinku ट्रेंड किया और उनके परिवार के लिए प्रार्थनाएं कीं।
टीम इंडिया और टूर्नामेंट पर असर
रिंकू सिंह उस समय एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट का हिस्सा थे। उनके अचानक घर लौटने से टीम संयोजन पर असर पड़ा। हालांकि टीम मैनेजमेंट ने स्पष्ट किया कि इस समय क्रिकेट से ज्यादा महत्वपूर्ण परिवार है।
सूत्रों के अनुसार, रिंकू कुछ समय तक क्रिकेट से दूर रह सकते हैं ताकि वे अपने परिवार के साथ समय बिता सकें।
अंतिम संस्कार और पारिवारिक माहौल
खांचंद सिंह का अंतिम संस्कार अलीगढ़ में पारिवारिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। स्थानीय लोगों और रिश्तेदारों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर श्रद्धांजलि दी।
पड़ोसियों ने बताया कि वे बेहद सरल और मिलनसार व्यक्ति थे। उन्हें अपने बेटे की सफलता पर बेहद गर्व था और वे अक्सर मोहल्ले में रिंकू की उपलब्धियों का जिक्र करते थे।
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रिंकू सिंह के पिता खांचंद सिंह का निधन सिर्फ एक खिलाड़ी के परिवार की व्यक्तिगत क्षति नहीं है, बल्कि यह हमें याद दिलाता है कि हर सफल खिलाड़ी के पीछे किसी न किसी माता-पिता का त्याग और संघर्ष छिपा होता है।
क्या आपको लगता है कि खेल जगत में खिलाड़ियों के परिवारों के त्याग और संघर्ष को उतनी पहचान मिलती है, जितनी मिलनी चाहिए?
क्या ऐसे कठिन समय में खिलाड़ियों को बिना किसी दबाव के पूरा समय परिवार के साथ बिताने का अवसर मिलना चाहिए?
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