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CBSE ने कक्षा 9 के छात्रों के लिए भाषा पढ़ाई से जुड़ा बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड के 15 मई 2026 के सर्कुलर के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 में तीन भाषाओं यानी R1, R2 और R3 का अध्ययन अनिवार्य होगा। इस नए नियम के तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी और इनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी चाहिए। CBSE ने यह बदलाव National Education Policy 2020 और National Curriculum Framework for School Education 2023 के अनुसार किया है।
1 जुलाई 2026 से लागू होगा बदलाव
CBSE के अनुसार, यह बदलाव 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के लिए लागू होगा। बोर्ड ने कहा है कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र अप्रैल 2026 से शुरू हो चुका है, इसलिए इस बदलाव को लागू करने के लिए transitional approach अपनाई जाएगी। इसका मतलब है कि स्कूलों और छात्रों को अचानक दबाव में डालने के बजाय धीरे-धीरे नए भाषा ढांचे के साथ जोड़ा जाएगा।
तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषाएं जरूरी
नए नियम में सबसे अहम बात यह है कि छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी और उनमें से कम से कम दो भाषाएं native Indian languages होनी चाहिए। अगर कोई छात्र विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है, तो वह उसे तीसरी भाषा के रूप में तभी चुन सकेगा जब बाकी दो भाषाएं भारतीय भाषाएं हों। इसके अलावा विदेशी भाषा को अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में भी चुना जा सकता है।
R1, R2 और R3 का मतलब क्या है?
CBSE ने भाषा पढ़ाई को R1, R2 और R3 के रूप में रखा है। सरल भाषा में समझें तो ये तीन अलग-अलग language levels या language choices हैं, जिन्हें छात्रों को अपने स्कूल की उपलब्धता और CBSE की भाषा सूची के अनुसार पढ़ना होगा। स्कूल अपने स्तर पर CBSE की सूची से भाषाओं का चयन कर सकेंगे, लेकिन यह ध्यान रखना होगा कि तीनों में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की हों।
तीसरी भाषा का बोर्ड परीक्षा में पेपर नहीं होगा
छात्रों और अभिभावकों के लिए सबसे राहत वाली बात यह है कि तीसरी भाषा यानी R3 का कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में अलग से बोर्ड पेपर नहीं होगा। CBSE ने स्पष्ट किया है कि R3 का assessment पूरी तरह school-based और internal होगा। इसका प्रदर्शन CBSE certificate में दिखाया जाएगा, लेकिन R3 की वजह से किसी छात्र को कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा।
छात्रों पर परीक्षा का दबाव कम रखने की कोशिश
CBSE ने अपने सर्कुलर में यह भी कहा है कि इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा दबाव बढ़ाना नहीं है, बल्कि meaningful language learning को बढ़ावा देना है। बोर्ड ने लिखा है कि focus joyful और meaningful language learning पर रहेगा, न कि examination pressure पर। इसी वजह से R3 को बोर्ड परीक्षा से अलग रखकर internal assessment के आधार पर पढ़ाया जाएगा।
किताबों और संसाधनों की व्यवस्था
CBSE ने यह भी बताया है कि जब तक dedicated R3 textbooks उपलब्ध नहीं हो जातीं, तब तक कक्षा 9 के छात्र चुनी गई भाषा की Class VI R3 textbooks 2026-27 edition का उपयोग करेंगे। इन किताबों के साथ स्कूल एक उपयुक्त local या state literary material भी जोड़ सकेंगे, जैसे short stories, poems या non-fiction works। CBSE ने कहा है कि supplementary literary material के चयन और उपयोग को लेकर विस्तृत guidelines 15 जून 2026 तक जारी की जाएंगी।
19 भाषाओं में R3 किताबें विकसित की जा रही हैं
CBSE और NCERT की ओर से Class VI R3 textbooks 19 scheduled languages में विकसित की जा रही हैं। इनमें Assamese, Bengali, Bodo, Dogri, Gujarati, Kannada, Kashmiri, Konkani, Maithili, Malayalam, Manipuri, Marathi, Nepali, Odia, Punjabi, Santhali, Sindhi, Tamil और Telugu शामिल हैं। बाकी भारतीय भाषाओं के लिए उपलब्ध SCERT और state-level resources का उपयोग किया जा सकेगा।
स्कूलों को OASIS पोर्टल पर जानकारी अपडेट करनी होगी
CBSE ने स्कूलों से कहा है कि वे कक्षा 6 से 9 तक R3 offering की जानकारी OASIS portal पर 30 जून 2026 तक अपडेट करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूलों में कौन-कौन सी भाषाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और छात्र किन विकल्पों के साथ पढ़ाई कर सकते हैं। इससे बोर्ड को लागू व्यवस्था की निगरानी करने में भी मदद मिलेगी।
भाषा शिक्षकों की कमी पर अंतरिम व्यवस्था
कई स्कूलों में भारतीय भाषाओं के पर्याप्त qualified teachers उपलब्ध न होने की समस्या आ सकती है। इसे देखते हुए CBSE ने अंतरिम व्यवस्था की भी अनुमति दी है। बोर्ड ने कहा है कि ऐसे स्कूल existing teachers की मदद ले सकते हैं, अगर वे संबंधित भारतीय भाषा में functional proficiency रखते हों। इसके अलावा inter-school resource sharing, Sahodaya clusters, virtual या hybrid teaching support, retired language teachers और qualified postgraduates की सहायता भी ली जा सकती है।
विशेष छात्रों और विदेशी छात्रों के लिए राहत
CBSE ने कुछ विशेष प्रावधान भी रखे हैं। Children with Special Needs यानी CwSN छात्रों को RPwD Act, 2016 के अनुसार छूट दी जा सकती है, जिसमें second या third language से exemption भी शामिल हो सकता है। CBSE schools outside India और विदेश से भारत लौटने वाले foreign students के लिए भी case-by-case आधार पर राहत का प्रावधान रखा गया है।
छात्रों और अभिभावकों पर क्या असर पड़ेगा?
इस फैसले का असर सीधे कक्षा 9 के छात्रों और उनके अभिभावकों पर पड़ेगा। छात्रों को अब तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, इसलिए भाषा चयन को लेकर स्कूल और परिवारों को सोच-समझकर निर्णय लेना होगा। हालांकि, तीसरी भाषा का बोर्ड परीक्षा में पेपर न होने से छात्रों पर बड़ा परीक्षा दबाव नहीं आएगा। यह बदलाव उन छात्रों के लिए भाषा कौशल बढ़ाने का मौका बन सकता है, जो भारतीय भाषाओं और अलग-अलग भाषाई संस्कृति को समझना चाहते हैं।
स्कूलों की तैयारी अहम रहेगी
इस नियम को सफल बनाने में स्कूलों की भूमिका सबसे अहम होगी। स्कूलों को समय पर भाषा विकल्प तय करने होंगे, शिक्षकों की व्यवस्था करनी होगी और अभिभावकों को साफ जानकारी देनी होगी। अगर स्कूल भाषा चयन, किताबों और assessment pattern को सरल तरीके से समझाते हैं, तो छात्रों और parents के बीच confusion कम होगा। CBSE ने भी स्कूलों से इन provisions को students, teachers और parents तक सकारात्मक रूप से पहुंचाने को कहा है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, CBSE का नया तीन-भाषा नियम कक्षा 9 के छात्रों के लिए बड़ा शैक्षणिक बदलाव है। 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 में R1, R2 और R3 के रूप में तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होंगी। विदेशी भाषा का विकल्प भी रहेगा, लेकिन उसके लिए दो भारतीय भाषाएं पढ़ना जरूरी होगा। सबसे अहम बात यह है कि तीसरी भाषा R3 का कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में पेपर नहीं होगा और उसका assessment स्कूल स्तर पर internal रहेगा। यह फैसला छात्रों को बहुभाषी बनाने और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
CBSE के इस नए भाषा नियम पर आपकी क्या राय है? क्या तीन भाषाओं की पढ़ाई से छात्रों को भविष्य में बेहतर भाषा कौशल मिलेगा?
