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गुजरात के सूरत में दर्ज एक cyber fraud case की जांच ने पुलिस को एक बड़े network तक पहुंचा दिया। मामला शुरुआत में एक Western Railway कर्मचारी से जुड़ा था, जिसे pension activation के नाम पर भरोसे में लिया गया और उसके खाते से ₹8.12 लाख निकाल लिए गए। शिकायत दर्ज होने के बाद Surat Cyber Crime Police ने पैसों के flow और bank details की जांच शुरू की। इसी जांच के दौरान पुलिस को मध्य प्रदेश के Rewa से जुड़े लोगों का पता चला, जिसके बाद पूरा मामला एक बड़े cyber network की ओर मुड़ गया। Times of India और DeshGujarat की reports के अनुसार, जांच में 391 bank accounts और ₹19.24 करोड़ के suspicious transactions की जानकारी सामने आई।
Rewa तक पहुंची जांच
सूरत पुलिस की जांच में सबसे पहले Pranshu Pathak नाम का व्यक्ति सामने आया, जिसके पास ठगी गई रकम का एक हिस्सा पहुंचा था। पूछताछ में उसने बताया कि cyber fraud और online betting से जुड़ा एक group Rewa में rented flat से काम कर रहा था। इसके बाद Surat Cyber Crime Police की team ने Rewa में raid की और वहां से कई आरोपियों को पकड़ा। Reports के मुताबिक कुल 9 लोगों की गिरफ्तारी हुई, जिसमें पहले Pranshu Pathak और फिर flat से पकड़े गए 8 अन्य लोग शामिल हैं।
391 खातों का जाल
जांच में 391 bank accounts की जानकारी सामने आई, जिनके जरिए करीब ₹19.24 करोड़ के transactions हुए बताए गए। पुलिस के अनुसार, ये accounts अलग-अलग cyber fraud complaints से जुड़े हुए पाए गए। ऐसे cases में bank accounts का इस्तेमाल पैसे को एक जगह से दूसरी जगह भेजने, फिर route बदलने और tracing को मुश्किल बनाने के लिए किया जाता है। अभी पुलिस यह देख रही है कि इन accounts को किसने खुलवाया, किसने इस्तेमाल किया और पैसों का अंतिम flow कहां तक गया।
21 राज्यों से कनेक्शन
यह मामला सिर्फ गुजरात तक सीमित नहीं रहा। Reports के अनुसार, इस network का connection 21 राज्यों में दर्ज 110 cyber fraud complaints से जुड़ा मिला है। Rajasthan से सबसे ज्यादा 16 complaints का जिक्र report में आया है। इसका मतलब यह है कि इस group का असर कई राज्यों तक फैला हुआ था और victims अलग-अलग जगहों के हो सकते हैं। पुलिस अब इन शिकायतों को जोड़कर पूरी chain समझने की कोशिश कर रही है।
DRM अधिकारी बनकर भरोसा
शुरुआती case में आरोपियों ने खुद को Divisional Railway Manager office से जुड़ा बताकर victim को भरोसे में लिया। pension से जुड़े काम का बहाना बनाकर उसे पैसे transfer करने के लिए तैयार किया गया। ऐसे मामलों में fraud करने वाले अक्सर सरकारी office, bank या official process जैसा माहौल बनाते हैं, ताकि सामने वाला व्यक्ति जल्दी भरोसा कर ले। इस case में भी pension का नाम इस्तेमाल हुआ, जिससे victim को लगा कि प्रक्रिया genuine हो सकती है।
Online platform का इस्तेमाल
Police investigation में BetBook247.com नाम की एक online gaming/betting platform का भी जिक्र सामने आया। Reports के अनुसार, आरोपी इसी platform के जरिए betting IDs जारी करते थे और users को betting करने देते थे। पुलिस का कहना है कि cyber fraud से आए पैसों का इस्तेमाल betting winnings के payment में भी किया जा रहा था। इस angle की जांच इसलिए अहम है, क्योंकि इससे पता चलता है कि fraud से आए पैसे को अलग-अलग channels में घुमाने की कोशिश की जा रही थी।
Raid में क्या मिला
Rewa में हुई कार्रवाई के दौरान पुलिस ने electronic devices और banking material जब्त किए। Times of India की report के अनुसार, raid में 27 mobile phones, 3 laptops, 51 debit cards, 13 SIM cards, 23 bank passbooks, 4 account books और एक router मिले। ये सामान investigation के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि mobile phones, laptops और bank documents से transactions, contacts और account operations की जानकारी मिल सकती है।
पकड़े गए आरोपी
Reports में जिन आरोपियों के नाम सामने आए हैं, उनमें Gulfam Hussain, Abhinav Pandey, Samir Hussain, Dharmaraj Vishwakarma, Aditya Sahani, Aftab Hussain, Taufiq Ali और Shahnawaz Ali शामिल हैं। इसके अलावा Pranshu Pathak को पहले पकड़ा गया था, जिसके जरिए Rewa वाले flat और बाकी आरोपियों तक पुलिस पहुंची। पुलिस अब alleged masterminds Chetan और Shubham की तलाश कर रही है।
पुलिस की आगे की दिशा
अब Surat Cyber Crime Police के सामने सबसे बड़ा काम money trail को साफ करना है। 391 bank accounts में पैसा कैसे आया, किस account से आगे भेजा गया, कौन account holder था और किसने operation control किया—ये सभी points जांच का हिस्सा होंगे। Cyber cases में केवल arrest करना काफी नहीं होता, बल्कि digital evidence, transaction records, device data और complaint mapping को जोड़ना भी जरूरी होता है। इसी से पता चलेगा कि network में कौन किस भूमिका में था।
लोगों के लिए सीख
इस case से आम लोगों के लिए भी एक साफ संदेश निकलता है। Pension, bank KYC, account update, courier, refund, electricity bill या government scheme के नाम पर आने वाली unknown calls और links से सावधान रहना जरूरी है। कोई भी official department फोन पर पैसे transfer करने, OTP बताने या suspicious link खोलने के लिए नहीं कहता। अगर किसी को ऐसे call या message मिलते हैं, तो पहले संबंधित office या bank की official branch से verify करना चाहिए।
समय पर शिकायत जरूरी
Cyber fraud में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। अगर किसी के खाते से पैसे गलत तरीके से transfer हो जाएं, तो तुरंत bank को inform करना चाहिए और National Cyber Crime Helpline 1930 या cybercrime portal पर complaint दर्ज करनी चाहिए। जल्दी शिकायत करने से कई बार transaction को trace करने या रकम freeze करने की संभावना बढ़ जाती है। इस मामले में भी victim की complaint से investigation शुरू हुई और पुलिस एक बड़े network तक पहुंची।
निष्कर्ष
सूरत Cyber Crime Police की यह कार्रवाई एक बड़े nationwide cyber network से जुड़ी मानी जा रही है। Confirmed reports के अनुसार, मामले की शुरुआत एक railway employee से ₹8.12 लाख की ठगी से हुई, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर Rewa से संचालित network, 391 bank accounts, ₹19.24 करोड़ के transactions और 21 राज्यों की 110 complaints का connection सामने आया। पुलिस ने 9 लोगों को पकड़ा है और आगे money trail, online platform, bank accounts और मुख्य संचालकों की भूमिका की जांच कर रही है। यह मामला दिखाता है कि cyber fraud अब केवल एक phone call या link तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई बार इसके पीछे organized network काम करता है।
इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? क्या pension, bank और government process से जुड़े online fraud को रोकने के लिए awareness campaign और मजबूत होना चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं।
